google.com, 2481387975166658, DIRECT, f08c47fec0942fa0 नरपतगंज बिजली विभाग के जेई निलंबित — बिजली चोरी छुपाने के लिए घूस मांगने का वीडियो वायरल, त्वरित कार्रवाई

नरपतगंज बिजली विभाग के जेई निलंबित — बिजली चोरी छुपाने के लिए घूस मांगने का वीडियो वायरल, त्वरित कार्रवाई


प्रतिनिधि, नरपतगंज | दिनांक: 15 जुलाई 2025

नरपतगंज, अररिया: बिहार के अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड से एक और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ बिजली विभाग के एक कनिष्ठ अभियंता (जेई) विवेक कुमार को बिजली चोरी के मामले को दबाने के एवज में रिश्वत मांगने के आरोप में विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब एक किसान द्वारा जेई को रुपये मांगते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने का वीडियो वायरल हुआ।



इस घटना ने न सिर्फ बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता को यह भी दिखाया है कि सच बोलने और सबूत जुटाने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई संभव है।



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पूरा मामला क्या है?


बिजली विभाग की आंतरिक रिपोर्ट संख्या 885 दिनांक 03 जुलाई 2025 के अनुसार, नरपतगंज पावर ग्रिड में कार्यरत कनिष्ठ विद्युत अभियंता विवेक कुमार पर आरोप है कि उन्होंने नरपतगंज प्रखंड के किसान रवींद्र कुमार से उस समय अवैध रूप से पैसे की मांग की जब उनके खेतों में बिजली चोरी की शिकायत दर्ज की गई थी।


सूत्रों के अनुसार, रवींद्र कुमार के खेतों में अवैध कनेक्शन की सूचना मिलने पर बिजली विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। लेकिन, जब टीम वापस लौटी, तो जेई विवेक कुमार ने किसान को बुलाया और स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह मामला रफा-दफा करवाना चाहते हैं, तो उन्हें 20 हजार रुपये देने होंगे।


किसान ने जब यह बात सुनी, तो उसने पूरे प्रकरण का वीडियो बना लिया, जिसमें जेई रिश्वत की मांग करते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं। यही वीडियो बाद में विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सौंपा गया, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई


विभाग की त्वरित कार्रवाई


जैसे ही वीडियो विभागीय मुख्यालय तक पहुंचा, बिजली आपूर्ति शाखा ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल विवेक कुमार को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। विभाग की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि “किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा अवैध धन की मांग करना कंपनी की छवि धूमिल करता है और यह कदाचार की श्रेणी में आता है।”


विभाग ने साफ किया है कि यह रिश्वत बिजली कनेक्शन देने के लिए नहीं, बल्कि बिजली चोरी के एक दर्ज मामले को 'समझौता' कर खत्म करने के उद्देश्य से मांगी गई थी, जो कि कानूनन अपराध है।


किसान की सजगता बनी सबक


इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी भूमिका निभाई किसान रवींद्र कुमार ने, जिन्होंने न केवल विवेक कुमार की मांग को ठुकराया, बल्कि साहस के साथ उसे कैमरे में रिकॉर्ड भी किया। रवींद्र कुमार ने बताया, “मुझसे कहा गया कि अगर मैं यह मामला दबवाना चाहता हूं, तो मुझे पैसे देने होंगे। मुझे लगा कि यह सरासर अन्याय है, इसलिए मैंने सबूत इकट्ठा किया और सीधे उच्च अधिकारियों व विधायक को सौंपा।”


रवींद्र ने यह भी कहा कि, “अगर मैंने चुप्पी साध ली होती, तो यह अधिकारी अगली बार किसी और गरीब किसान को डराकर वसूली करता। मैंने सोचा कि इसके खिलाफ आवाज उठाना ही सही है।”


विधायक ने जताई नाराजगी, की सख्त कार्रवाई की मांग


घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय विधायक जयप्रकाश यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “बिजली विभाग में इस तरह की घटनाएं पूरी व्यवस्था को बदनाम करती हैं। एक गरीब किसान से बिजली चोरी जैसे मामले में डराकर रिश्वत मांगना शर्मनाक है।”


विधायक ने बिजली विभाग से कहा है कि “अगर कोई अन्य अधिकारी भी इस प्रकरण में शामिल है, तो उसे भी जाँच के घेरे में लाया जाए। ऐसे लोगों पर केवल निलंबन नहीं, बल्कि विभागीय व विधिक कार्रवाई होनी चाहिए।”


जाँच समिति का गठन, होगी व्यापक जाँच


बिजली विभाग ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति गठित की है, जिसमें विद्युत अधीक्षण अभियंता, लेखा अधिकारी और तकनीकी निरीक्षक शामिल हैं। इस समिति को 7 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।


विभाग का कहना है कि यदि विवेक कुमार पर पूर्व में भी ऐसे आरोप लगे हैं या यदि कोई और कर्मचारी इसमें शामिल है, तो उस पर भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।


सिस्टम में पारदर्शिता की माँग


यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है। इस तरह के मामलों को रोकने के लिए अब जरूरी है कि:


ऑनलाइन शिकायत पोर्टल को मजबूत किया जाए

क्षेत्रीय निरीक्षणों की ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की जाए

हर कर्मचारी की मासिक रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा हो

आम जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए






नरपतगंज का यगरिकता भ्रष्टाचार के खिलयह घटना हमें ब, जनता की भागीदारी से ही समाप्त किया जा सकता है। यदि हर व्यक्ति गलत को गलत कहने की हिम्मत रखे, तो व्यवस्था में सुधार निश्चित है।


अब देखना यह है कि विभागीय जांच किस दिशा में जाती है और क्या आरोपी को मात्र निलंबन तक सीमित रखा जाएगा या कानूनी कार्रवाई भी होगी। जनता और मीडिया की नजरें इस मामले पर टिकी हैं।

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