पूछता है फारबिसगंज: आखिर नगर परिषद क्या कर रही है? करोड़ों की योजनाएं, लेकिन जलजमाव से त्रस्त जनता
फारबिसगंज, अररिया — शहर की सूरत बदलने के नाम पर नगर परिषद द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कहीं हाईटेक कैमरे लगाए जा रहे हैं, तो कहीं डिजिटल बोर्ड लगाकर ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना दिखाया जा रहा है। लेकिन इसी शहर के सदर रोड सहित अन्य प्रमुख इलाकों में हर साल बरसात के मौसम में जलजमाव की समस्या से जनता का जीना मुहाल हो जाता है। आखिर ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है — "आखिर नगर परिषद फारबिसगंज कर क्या रही है?"
चुनाव पूर्व वादे और वर्तमान हकीकत
चुनाव से पूर्व नगर परिषद की माननीय अध्यक्ष महोदया ने सदर रोड को जलजमाव से निजात दिलाने को प्राथमिक एजेंडा बताया था। यह मुद्दा जनसभाओं और घोषणापत्रों में खूब उछला। जनता ने भरोसा जताया और मतदान कर इन्हें विजयी बनाया। मगर अफसोसजनक बात यह है कि आज तीन साल पूरे होने को हैं, और स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। सदर रोड, जो शहर की प्रमुख सड़क मानी जाती है, आज भी मामूली बारिश में तालाब में तब्दील हो जाती है।
क्या जनता ने जनप्रतिनिधियों को सिर्फ घोषणाएं करने और सोशल मीडिया पर तस्वीरें खिंचवाने के लिए चुना था? विकास के नाम पर सिर्फ बोर्ड, बैनर और फोटोशूट ही होता रहेगा या ज़मीनी बदलाव भी देखने को मिलेगा?
विकास बनाम दिखावा
नगर परिषद द्वारा शहर में जगह-जगह कैमरे लगाए गए हैं, डिजिटल सूचना बोर्ड लगाए गए हैं और दावा किया जा रहा है कि फारबिसगंज को आधुनिक बनाने की दिशा में यह ‘महत्वपूर्ण’ कदम हैं। लेकिन आम नागरिक पूछ रहा है कि क्या ये ही प्राथमिकताएं हैं? क्या शहर की जनता की मूलभूत समस्याएं, जैसे जल निकासी, टूटी सड़कों की मरम्मत, साफ-सफाई, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था आदि से ज़्यादा ज़रूरी डिजिटल बोर्ड और कैमरे हो गए हैं?
शहर की गलियों में बदबूदार पानी जमा है, मच्छरों का आतंक है, बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है, लेकिन किसी को चिंता नहीं। चुनाव जीतने के बाद माननीय मुख्य पार्षद और अन्य प्रतिनिधि सिर्फ शिलान्यास और उद्घाटन के अवसरों पर ही दिखाई देते हैं।
जनता का आक्रोश – पूछता है फारबिसगंज
"जनता ने वोट देकर जिन्हें अपना प्रतिनिधि चुना, वे अब आम जनता की समस्याओं से आंखें मूंदे हुए हैं," – यह कहना है स्थानीय व्यवसायी नीरज कुमार का।
छात्रा प्रियंका झा कहती हैं, "हर दिन स्कूल जाते समय कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, और कोई सुनवाई नहीं होती।"
व्यवसायी राकेश यादव का कहना है, "दुकानों के सामने पानी जमा है, ग्राहक आना बंद कर दिए हैं, लेकिन पार्षद जी फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं।"
क्या यही है विकास?
अखबारों की सुर्खियों में और फेसबुक पोस्टों में फारबिसगंज का चेहरा चमकाया जा रहा है, मगर ज़मीनी सच्चाई इससे अलग है। नगर परिषद के कार्यों पर सवाल उठाना अब केवल विपक्ष का कार्य नहीं रह गया है, बल्कि अब आम जनता भी पूछ रही है — क्या यही है उनका विकास कार्य?
क्या जनता ने इन्हें अपनी सेवा के लिए चुना था या सिर्फ खुद का विकास कराने के लिए?
जब पार्षदों के वाहन चमचमाते हैं, उनके पोस्टर बड़े-बड़े लगते हैं, लेकिन जनता की गली में जलजमाव होता है, तब सवाल पूछना जरूरी हो जाता है।
भ्रष्टाचार और जनता का टूटा भरोसा
नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है। वार्डों में योजनाएं सिर्फ कागजों पर चल रही हैं। ठेकेदारों से सांठगांठ, आधे-अधूरे काम, और गुणवत्ता की अनदेखी ने फारबिसगंज के विकास को धीमा नहीं, लगभग ठप कर दिया है।
जब तक नगर परिषद में कुछ भ्रष्ट नेता रहेंगे, तब तक फारबिसगंज का विकास नामुमकिन है।
जनता की चेतावनी: अब नहीं दोहराई जाएगी गलती
जनता अब जागरूक हो रही है। शहर के युवा, व्यापारी, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इस बात को लेकर एकमत हो रहे हैं कि अब फिर वही गलती नहीं होगी। अगला चुनाव आने में महज़ दो साल बचे हैं, और जनता ने मन बना लिया है — अबकी बार ऐसे नेताओं को जमीन पर लाना है जो सिर्फ दिखावा नहीं, असली विकास करें।
फारबिसगंज पूछ रहा है —
- सदर रोड से जलजमाव कब खत्म होगा?क
- कैमरे और डिजिटल बोर्ड की जगह जलनिकासी पर ध्यान क्यों नहीं?फो
- फोटो खिंचवाकर सोशल मीडिया पर डालना ही काम है क्या?
क्या जनता को विकास का हक नहीं?
जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, फारबिसगंज की जनता चुप नहीं बैठेगी। यह जनतंत्र है, और यहां जनता सबसे ऊपर है। अब जवाबदेही का समय है।
फारबिसगंज सिर्फ पूछ नहीं रहा, अब जवाब भी लेगा।

Post a Comment