जोगबनी, अररिया | 19 जून 2025
जोगबनी नगर परिषद ने एक बड़ी पहल करते हुए सीमावर्ती कस्बे को सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नगर परिषद की योजना के तहत अब जोगबनी में ‘सम्राट अशोक भवन’ का निर्माण किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹1.65 करोड़ है। यह भवन न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि नेपाल से आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा।
सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा मंच
जोगबनी जैसे सीमावर्ती शहर में अब तक कोई ऐसा स्थायी मंच नहीं था जहां शादी-ब्याह, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सरकारी बैठकों या सामाजिक सभाओं का आयोजन किया जा सके। ज्यादातर लोग महंगे सामुदायिक भवन किराए पर लेकर कार्यक्रम करते हैं या खुले मैदानों में टेंट लगाकर व्यवस्था करते हैं, जिससे ना केवल असुविधा होती है बल्कि मौसम की मार भी इन आयोजनों को प्रभावित करती है। ऐसे में यह नया भवन स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करेगा।
आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा भवन
‘सम्राट अशोक भवन’ को पूरी तरह आधुनिक स्वरूप में तैयार किया जाएगा। इसमें एक बड़ा हॉल, मंच (स्टेज), ड्रेसिंग रूम, अलग-अलग एंट्री-एग्ज़िट प्वाइंट, साउंड सिस्टम, एलईडी लाइटिंग, सीसीटीवी सुरक्षा कैमरे, पार्किंग की सुविधा और महिलाओं व दिव्यांगों के लिए अलग से सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्माण का कार्य टेंडर प्रक्रिया के तहत जल्द ही शुरू होने वाला है।
सीमावर्ती सहयोग को बढ़ावा
जोगबनी नेपाल सीमा से सटा हुआ एक प्रमुख व्यापारिक शहर है। यहां पर हर दिन हजारों लोग नेपाल के विराटनगर, रानी, रंगेली आदि क्षेत्रों से आते-जाते हैं। इस कारण जोगबनी की पहचान केवल एक कस्बे की नहीं, बल्कि एक सीमावर्ती कॉरिडोर के रूप में भी बन चुकी है। ‘सम्राट अशोक भवन’ नेपाल-भारत के सांस्कृतिक रिश्तों को भी मजबूती देगा। नेपाल से आने वाले सांस्कृतिक दलों को भी इस भवन में स्थान मिल सकेगा, जिससे सीमापार सहयोग को नया बल मिलेगा।
स्थानीय रोजगार को भी मिलेगा प्रोत्साहन
इस भवन के निर्माण और बाद में इसके रख-रखाव से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। कार्यक्रमों में कैटरिंग, डेकोरेशन, साउंड सिस्टम, हाउसकीपिंग जैसी सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय व्यवसायियों और श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
पार्षदों व जनता की भूमिका
नगर परिषद के वार्ड पार्षदों ने इस योजना को लेकर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खासकर युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया था। अब जब योजना धरातल पर उतर रही है, तो नागरिकों में खासा उत्साह है। कई लोगों का कहना है कि इससे जोगबनी की छवि एक व्यवस्थित और उन्नत कस्बे के रूप में उभरेगी।
निष्कर्ष
‘सम्राट अशोक भवन’ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनने जा रहा है जो सीमावर्ती जोगबनी को सामाजिक मजबूती और नई पहचान देगा। नगर परिषद की यह पहल विकास और संस्कृति को साथ लेकर चलने वाली सोच का सशक्त उदाहरण है। यदि समय पर इसका निर्माण और संचालन सही तरीके से होता है, तो यह भवन आने वाले वर्षों में जोगबनी के गौरवशाली विकास गाथा का हिस्सा बन सकता है।

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