बिहार के अररिया जिले का सीमावर्ती शहर जोगबनी, जहां से नेपाल के विराटनगर के लिए हजारों यात्रियों की
आवाजाही होती है, वह आज एक अहम समस्या से जूझ रहा है – रेलवे स्टेशन रोड पर जलजमाव और कीचड़ की गंभीर स्थिति। यह समस्या सिर्फ स्थानीय निवासियों या दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जोगबनी से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के लिए रोजमर्रा की एक बड़ी चुनौती बन चुकी है।
बारिश के बाद जलजमाव: सड़क या तालाब?
जैसे ही मानसून की पहली बारिश हुई, जोगबनी रेलवे स्टेशन रोड एक बार फिर पुराने हालात में लौट आया। सड़क पर हर जगह पानी भरा हुआ, चारों ओर कीचड़, फिसलन और गाड़ियों की रफ्तार पर ब्रेक – यह हालात अब आम हो चुके हैं।
रेलवे स्टेशन से निकलते ही यात्रियों को घुटनों तक कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है। खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
स्थानीय निवासी रंजीत साह कहते हैं:
“बारिश होते ही स्टेशन रोड नाले में बदल जाता है। आने-जाने वाले लोगों को जूते निकालकर चलना पड़ता है। कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं।”
व्यवसायियों की हालत बदतर
स्टेशन रोड पर छोटे-छोटे होटल, मिठाई दुकानें, कपड़े की दुकानें और ऑटो स्टैंड हैं, जहां से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी चलती है। लेकिन जलजमाव और कीचड़ ने व्यापार को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।
शब्बीर आलम, जो स्टेशन रोड पर 15 वर्षों से चाय की दुकान चलाते हैं, बताते हैं:
“ग्राहक आते नहीं, कीचड़ देखकर वापस लौट जाते हैं। बारिश के दिनों में 50% तक व्यापार घट जाता है। कई बार दुकान में पानी तक घुस जाता है।”
आवागमन पर पड़ा बुरा असर
स्टेशन रोड जोगबनी का सबसे व्यस्त मार्ग है। इसी रास्ते से यात्रियों को रेलवे स्टेशन, नेपाल सीमा, कस्टम ऑफिस और लोकल बाजारों तक पहुंचना होता है। लेकिन जलजमाव के कारण ऑटो और रिक्शा वाले इस मार्ग पर चलने से कतराते हैं। इससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है।
दरभंगा से आए यात्री शिवानी कुमारी कहती हैं:
“मैं पहली बार जोगबनी आई, स्टेशन से बाहर निकली तो ऐसा लगा जैसे गांव के किसी खेत में आ गई हूं। न सड़क दिख रही थी, न ऑटो स्टैंड।”
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार नगर परिषद और रेलवे प्रशासन को ज्ञापन दिए गए, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।
पिछले साल सड़क मरम्मत के नाम पर कुछ गड्ढे भरे गए थे, लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था आज तक नहीं की गई। नतीजा वही – पहली बारिश में पूरा सिस्टम ध्वस्त।
जोगबनी नगर परिषद के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“फंड की कमी और विभागों के बीच तालमेल न होने से सड़क और नालियों की योजना अटक जाती है।”
स्वच्छता अभियान की पोल खुली
एक तरफ सरकार स्वच्छ भारत अभियान की बात करती है, दूसरी तरफ स्टेशन रोड जैसी प्रमुख जगहों पर कीचड़ और कूड़े का अंबार दिखता है। कई जगहों पर नालियां पूरी तरह जाम हैं, जिससे पानी सड़क पर फैल जाता है।
स्थानीय छात्रा प्रिया कुमारी कहती हैं:
“हमारे स्कूल का रास्ता स्टेशन रोड से होकर जाता है, रोज स्कूल की ड्रेस गंदी हो जाती है। हमें लगता है जैसे हम किसी पिछड़े गांव में रह रहे हैं।”
जनप्रतिनिधियों से उम्मीदें
स्थानीय पार्षद और विधायक को इस मुद्दे की जानकारी है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस पहल अब तक नहीं हुई। हालांकि हाल ही में हुई एक जनसुनवाई में विधायक ने यह कहा कि "जोगबनी स्टेशन रोड के लिए अलग से ड्रेनेज योजना बनाई जा रही है, जिसकी स्वीकृति जल्द मिलेगी।"
क्या है समाधान?
विशेषज्ञों के अनुसार इस समस्या का स्थायी समाधान तब ही संभव है जब:
जलनिकासी के लिए मजबूत अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए।
सड़क को ऊंचा करके दोनों ओर पक्की नालियों का निर्माण किया जाए।
स्थायी टाइल्स या सीमेंटेड पथ से फिसलन और कीचड़ को रोका जाए।
प्रशासन, रेलवे और नगर परिषद के बीच समन्वय हो।
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निष्कर्ष: उम्मीद की राह लंबी है
जोगबनी रेलवे स्टेशन रोड की स्थिति विकास की मूलभूत जरूरतों पर सवाल खड़े करती है। सीमावर्ती व्यापारिक नगरी होने के बावजूद यहां की सड़कें, विशेषकर बारिश में, उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बन गई हैं।
जब तक नालियों की सफाई, जलनिकासी और सड़क की मरम्मत जैसे मूलभूत कार्य प्राथमिकता में नहीं लाए जाएंगे, तब तक जोगबनी रेलवे स्टेशन रोड विकास के दावों के बीच कीचड़ में धंसी ही नजर आएगी।

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